आमिर ख़ान की 'तारे ज़मीं पर' जैसे ही बॉक्स आफिस पर सफलता का परचम लहराने लगी तो कई अभिनेताओं के मन में खुद निर्देशन कार्य में उतरने का ख्याल आया, उन अभिनेताओं में एक है अजय देवगन.
आमिर ख़ान ने लोगों की भावनाओं को भाँपते हुए फिल्म को इमोश्नल टच दिया और पूरी फिल्म बच्चे पर केंद्रित कर दी, जोकि एक डिस्लैक्सिया नामक बीमारी से पीड़ित था.
इस बच्चे को टीचर अभिभावक बहुत डाँटते हैं, परिवार में इस बच्चे की भावनाओं को कोई नहीं समझता, बेशक एक रुपहले पर्दे पर महज एक कहानी थी, मगर फिल्म देखने वालों को अपने बच्चे और अपना रवैया नजर आ रहा था. जिसके चलते फिल्म धीरे धीरे सफलता की सीढ़ी चढ़ने लगी.
इसकी तर्ज पर चलते हुए अजय देवगन ने बनाई 'यू मी और हम', अजय देवगन ने भी फिल्म का विषय एक बीमारी को चुना, मगर इस बार बीमारी का शिकार कोई बच्चा नहीं बल्कि एक व्यक्ति की पत्नी है. इस फिल्म में अजय की पत्नी को अलजाईमर नामक बीमारी है, इस बीमारी की शिकार पिया कुछ समय के लिए अपनी याददाश्त खो देती है.
इस फिल्म में अलजाईमर रोग से पीड़ित महिला के कारण एक खुशहाल परिवार कैसे मुसीबत में पड़ जाता है, वो सब दिखाया गया है. जिसको देखकर सिनेमाप्रेमी की खुद ब खुद आँख भर आती है. भारतीय सिनेमा में भावनात्मक फिल्मों को दर्शक मिले हैं, इस बात का सबूत 'आनंद' 'कल हो न हो' 'हम आपके हैं कौन' 'तारे ज़मीं पर' 'जोकर मेरा नाम' आदि फिल्में हैं.

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